Hindi Short Story- Chalak Khargosh

Paromita Pramanick
बच्चो की कहानी: चालाक खरगोश

एक बार की बात है जब निक्कू नाम का एक खरगोश सुंदर से एक घने बगीचे के आस-पास रहता था। उस बगीचे के आस-पास कई अन्य प्राणी भी रहते थे, परंतू बाग में जाने से वह सब डरते थे। एक दिन निक्कू अपनी पत्नी के साथ बाग में घूम रहा था, जब उसकी पत्नी की नज़र एक पेड पर पडी। पेड़ पर मीठे-मीठे ताज़ा फल लटके देखे तो उसके पत्नी के मुँह में पानी आ गया। उसने निक्कू को पेड़ से फल तोड़ कर लाने को कहा। इस पर निक्कू ने कहा कि, "यह बाग एक भेड़िये का है जो बहुत ही खूँखार है। अगर उसे पता चला कि हमने पेड़ से फल तोड़े है तो वह हम दोनों को मार कर खा जाएगा।" परन्तु निक्कू की पत्नी उसके समझाने पर भी ना मानी। हारकर निक्कू को पेड़ से फल तोड़ने के लिए जाना पड़ा।
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निक्कू और उसकी पत्नी
भेड़िया वहा बगीचे के एक कोने में तभी सो रहा था। निक्कू ने जैसे ही पेड़ से फल तोड़ने शुरू करे, उसके आवाज़ से वह भेडिया जाग गया और वहाँ उस पेड के पास पहूँच गया। निक्कू को संदह हो गया था कि भेड़िया जाग गया होगा, इस्लिए उसने अपनी पत्नी को पेड़ के पिछे जल्दी से छुप जाने को कहा।
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भेड़िया
और फिर निक्कू ने तुरंत फल लेकर वहां से भागा और वही पेड़ के पास एक ड्रम पडा था। निक्कू उस ड्रम में जाकर घूस गया और उसके अंदर में फल रखकर बाहर आकर चुपचाप खडा हो गया। तभी भेड़िया वहाँ आ गया और उसने निक्कू से पूछा, "क्या तुमने किसी खरगोश को यहा से फल ले जाते हुए देखा है।"
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निक्कू ड्रम के पास
निक्कू फौरन समझ गया कि भेड़िये ने उसे नहीं पहचाना। तभी उसे एक उपाय सूझा, उसने भेड़िये से कहा कि, "अभी एक खरगोश को मैंने इस ड्रम में घूसते हुए देखा है। उसके पास बहुत सारे फल थे।"
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निक्कू भेड़िये के साथ
भेड़िया ड्रम के पास गया, जब भेड़िये ने ड्रम के अंदर शूँगातो उसे वहां से फलों की खशबू आने लगीभेड़िये उस खरगोश को मारने के लिए उस ड्रम के अंदर घूस गया। अब जैसे ही भेड़िया ड्रम के अंदर घुसा, चालाक निक्कू ने फटाफट उस ड्रम का दरवाजा ढक्कन से बंद कर दिया। भेड़िया ड्रम में छटपटाने लगा और उसके अंदर ही कैद होकर रह गया। निक्कू और उसकी पत्नी ने राहत की सांस ली तथा दूसरे प्राणियों को भी यह सूसंवाद सुनाया। यह सुनकर दुसरे प्राणी बहुत प्रसन्न हुए तथा निक्कू को आदर और उच्छसित होकर बगीचे का मालीक घोषित कर दिया।

निक्कू ने अपने दिमाग का सही समय पर उपयोग किया और निपुण काम किया। निक्कू और उसकी पत्नी उस बगीचे के मालिक बन गए और वह कभी किसी प्राणी को फल तोडने से नहीं रोकते थे। सभी उस बाग में खुशी से आते और कोइ संकोच के बगैर उधर घूमते रहते थे। भेड़िया उस ड्रम के अंदर ही पड़े-पड़े मर गया, अब कोई भी उस खूंखार भेड़िये से भयभीत होकर न रहता था।
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निक्कू
इस तरह से निक्कू ने अपनी बुद्धि से न सिर्फ अपनी जान बचाई बल्कि उस बगिचे में आते हुए हर एक प्राणी की मदद की ताकी कोई भी उस भेडिये के आतंक से ना डरे और नाही छिपते हुए रहे। तथा चालाक निक्कू ने न केवल अपनी पत्नी की इच्छा पूर्ण कि बल्कि उस बगीचे का मालिक भी बन गया। फिर निक्कू और उसकी पत्नी दोनों भेड़िये के डर के बिना खुशी से अपना जिवन व्यतित करने लगे तथा बगीचे में आते हुए हर प्राणी का सम्मान करते थे। ।

सीख: चालाक बुद्धि परिस्थिति को न केवल संभाल सकता है परंतु उसे जीत भी लेता है।
Moral: Clever intelligence can handle not only the situation but also conquers it.

Reference: Conceptualised from खरगोश और भेड़िये की प्रेरक कहानी

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